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वंशानà¥à¤—त हो सकती है अलà¥à¤œà¤¼à¤¾à¤‡à¤®à¤° की बामारी, जानिठकà¥à¤¯à¤¾ हैं इसके लकà¥à¤·à¤£ और देखà¤à¤¾à¤² का तरीका
अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤°(Alzheimers) बीमारी होने की असल वजह का पता लगाने के लिठकई शोध (Research)चल रहे हैं. हालांकि अà¤à¥€ तक इसके ठोस कारणों के बारे में पता नहीं चल पाया है. आज इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम आपको इस बीमारी (Disease) के लकà¥à¤·à¤£ और उपाय के बारे में बता रहे हैं.
अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ à¤à¤• बीमारी है, जिसमें आदमी के सोचने समà¤à¤¨à¥‡ और चीजों को याद रखने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ काफी हद तक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है. यह बीमारी इतनी गंà¤à¥€à¤° हो सकती है कि आदमी की दैनिक कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ इसके चलते पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती हैं. यह तेजी से फैलने और याददाशà¥à¤¤ को हानि पहà¥à¤‚चाने वाली बीमारी है. इसकी वजह से न सिरà¥à¤« रोगी का जीवन पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है, बलà¥à¤•ि उसके परिवार के सà¤à¥€ सदसà¥à¤¯ परेशान हो जाते हैं. अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° की बीमारी कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती है, इस पर काफी शोध किया जा रहा हैं. कहा जा रहा है कि यह रोग वंशानà¥à¤—त à¤à¥€ हो सकता है. आइठजानते हैं इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ और उपचार के बारे में...
बहà¥à¤¤ धीरे-धीरे पता चलते हैं अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के लकà¥à¤·à¤£
अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के लकà¥à¤·à¤£ धीरे-धीरे पता चलते हैं और कà¥à¤› समय बीतने के बाद इनमें परिवरà¥à¤¤à¤¨ हो सकता है. कोई à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ इस बीमारी के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ नहीं कर सकता है. हालांकि कà¥à¤› उपचार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ठीक होने में मदद मिल सकती है, लेकिन इस रोग से हमेशा के लिठमà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ नहीं मिल सकती.अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में सà¥à¤®à¤°à¤£ शकà¥à¤¤à¤¿ कम होना, जिसमें हाल ही की घटनाओं के बारे में याद न होना, समय और सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के बारे में à¤à¥‚ल जाना, नई जानकारियां याद रखने में कठिनाई होना और वाहन चलाने, दवा लेने, खाना पकाने, कपड़े पहनने और नहाने जैसे काम कर पाने में काफी कठिनाई हो सकती है. अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के रोगी को किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को पहचानने में à¤à¥€ दिकà¥à¤•त हो सकती है.
अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° की जांच कैसे कराà¤à¤‚ ?
अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के रोगियों की जांच के लिठसिटी सà¥à¤•ैन, à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ या पीईटी सà¥à¤•ैन जैसे परीकà¥à¤·à¤£ करवाà¤à¤‚ जा सकते हैं. याददाशà¥à¤¤ कम होने के पैटरà¥à¤¨ और परिवरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मरीज में कितनी जागरूकता रहती है, इस बारे में à¤à¥€ अवलोकन किया जाता है. डॉकà¥à¤Ÿà¤° कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ पूछकर à¤à¥€ रोगी की मानसिक दशा जानने की à¤à¥€ कोशिश करते हैं. कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ मेडिकल टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ कराठजाते हैं.
65 की उमà¥à¤° के बाद जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° का खतरा
विशेषजà¥à¤ž का कहना है कि अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° रोग जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° 65 वरà¥à¤· से अधिक उमà¥à¤° के लोगों में देखा जाता है. यह रोग आनà¥à¤µà¤‚शिक होता है, लेकिन यदि किसी दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ में मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में चोट लगी हो तो यह à¤à¥€ अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° का कारण हो सकता है. जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले, उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª, हाई कोलà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² और मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ के रोगियों में à¤à¥€ अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° होने का खतरा होता है.
अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° का उपचार
अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के सही कारणों को पता लगाने के लिठकई शोध किठजा रहे हैं. वैसे तो अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° ठीक होना बहà¥à¤¤ मà¥à¤¶à¥à¤•िल है, लेकिन फिर à¤à¥€ अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के उपचार के लिठआजकल कई थैरेपी और फारà¥à¤®à¤¾à¤•ोलॉजिक टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट दिठजा रहे हैं, जिससे अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के रोगी के मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की कोशिकाओं को खतà¥à¤® होने से बचाया जा सके. खानपान पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देकर à¤à¥€ अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के खतरे को कम किया जा सकता है. इनमें शामिल हैं- हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, हरी चाय, दाल चीनी, सैलà¥à¤®à¤¨ मछली, हलà¥à¤¦à¥€. साथ ही नारियल और जैतून के तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥€ करना चाहिà¤. इसके अतिरिकà¥à¤¤ अलà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤®à¤° के रोगी की सही देखà¤à¤¾à¤² के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¥€ उनका उपचार किया जा सकता है. इन रोगियों को किसी न किसी गतिविधियों में à¤à¤¾à¤—ीदारी à¤à¥€ दिलाना चाहिà¤, जिससे उनकी मनोदशा में सà¥à¤§à¤¾à¤° हो सके. हर परेशानी में उनकी मदद करना चाहिठताकि वे सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को अकेला महसूस न करें.
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